दीवाली में घर की सफाई का महत्व (Diwali me Ghar ki Safai ka Mahatva)

दीपावली यानी प्रकाश का पर्व, सिर्फ दीप जलाने और मिठाइयाँ बाँटने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आत्मिक और भौतिक शुद्धि का भी प्रतीक है। भारत में सदियों से यह परंपरा रही है कि दीवाली से पहले घर की पूरी तरह सफाई की जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर दीवाली पर घर की सफाई का इतना महत्व क्यों माना जाता है — धार्मिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टि से।

🌼 1. धार्मिक महत्व

दीवाली के दिन माता लक्ष्मी जी का आगमन होता है। ऐसा माना जाता है कि माँ लक्ष्मी वहीं प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, प्रकाश और सकारात्मकता होती है।


अगर घर में गंदगी या अव्यवस्था है, तो माँ लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं। इसलिए घर की सफाई को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।

“जहाँ स्वच्छता है, वहीं लक्ष्मी का वास है।”

🔆 2. आध्यात्मिक और मानसिक दृष्टि से

सफाई सिर्फ धूल हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ऊर्जा को संतुलित करने का माध्यम भी है।
पुराने और बेकार सामान हमारे आसपास नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं। जब हम घर की सफाई करते हैं और अनावश्यक वस्तुएँ निकालते हैं, तो घर में नई सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
यह मनोवैज्ञानिक रूप से भी राहत देता है – जैसे हम पुराने बोझ को छोड़कर नए जीवन की शुरुआत कर रहे हों।

🪔 3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से

दीवाली के आसपास मौसम बदलता है, बरसात के बाद नमी और धूल की मात्रा बढ़ जाती है।
सफाई करने से –

  • कीटाणु और बैक्टीरिया खत्म होते हैं,
  • हवा शुद्ध रहती है,
  • एलर्जी और संक्रमण से बचाव होता है।
    इसलिए यह परंपरा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है।

🌺 4. आर्थिक और सामाजिक कारण

दीवाली से पहले घर की सफाई के साथ-साथ लोग घर की मरम्मत, पेंटिंग, सजावट और नए सामान की खरीदारी भी करते हैं।
इससे न केवल घर सुंदर बनता है बल्कि बाजार में व्यापार को भी प्रोत्साहन मिलता है।
इसी कारण इसे संपन्नता का त्योहार भी कहा जाता है।

🧹 5. अंदर-बाहर दोनों की सफाई ज़रूरी

दीवाली की सच्ची भावना तभी पूरी होती है जब हम सिर्फ घर ही नहीं, मन की भी सफाई करें।

  • ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं को त्यागें।
  • रिश्तों में प्रेम और क्षमा का दीप जलाएँ।
    यही आंतरिक सफाई जीवन में शांति और सुख का आधार बनती है।

🌟 निष्कर्ष

दीवाली की सफाई का अर्थ केवल झाड़ू-पोंछा करना नहीं है, बल्कि यह जीवन को नई दिशा देने की एक प्रक्रिया है।
जब घर स्वच्छ होता है, मन प्रसन्न होता है, और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है —
तभी दीपावली का वास्तविक आनंद मिलता है।

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